विवाह किसे कहते हैं?

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विवाह किसे कहते हैं? इसके क्या मायने है…शादी कर ली ओर फिर मोज मस्ती कर ली हनीमून मना लिया बच्चे पैदा कर लिए क्या इसे विवाह कहते है?नहीं इसे विवाह नहीं कहते।विवाह का अर्थ है।वि= यानी विष्णु, वा =यानी वाहन, ह =यानी हवन, (यज्ञ)इसका अर्थ है हम विवाह करके वाहन में बैठ कर, अग्नि को साक्षी मान कर विष्णु जी की तरफ बढ़ रहे हैं।यानी हम विष्णु की तरफ जाए तो अकेले न जाकर किसी के संग जाए विष्णु दरबार धर्म का है।धर्म कर्म हवन के लिए ,सजोड़े की जरूरत होती है, हवन में अकेले नहीं बैठते सजोड़े से बैठा जाता है, इसलिए धर्म कर्म यज्ञ में अर्धांगनी यानी जीवन संगनी जरूरी है, नवम भाव धर्म का हे ओर उससे सप्तम भाव 11 वा भाव हे।यानी लाभ का भावइसका मतलब है पूर्व जन्म में जो धर्म कर्म किए उसका लाभ जीवन संगनी के रूप में मिला है।सप्तम का लाभ भाव हे पंचम पंचम से संतान प्राप्ति देखी जाती हैं यानी दोनों ने मिलकर सप्तम भाव सम्बन्धित धर्म कर्म किए उसके लाभ में संतान मिली।इसलिए विवाह को कभी यह मत समझो की ये एक इंजॉय करने के लिए हे एक समय पास है।माता पिता एवं जीवन साथी संग तीर्थ स्थान पर साल में एक बार जरूर जाए।ओर साल में एक बार हवन जरूर कराए घर में,ओर विष्णु कथा जरूर करवाए पूर्णिमा के दिनईश्वर ने धरती पर धर्म कर्म करने के लिए मनुष्य को भेजा है ओर हवन के लिए जोड़ा बनाया है ओर सृष्टि का चक्र चलता रहे इसलिए संतान उत्पत्ति का विधान बनाया ओर यह एक पृकृति का विधान है।जानकारी यदि उचित लगे तो शेयर अवश्य करे।

जय श्री लक्ष्मी नारायण🙏
जय शिव शम्भू🙏

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