जानिए उन संत को, जिन्होंने संस्कृति और धर्म बचाने के लिए, 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस की शुरुआत की

बहुत सालों से आपने 25 दिसंबर को “तुलसी पूजन दिवस” का ट्रेंड ऑनलाइन चलते हुए देखा होगा। आपको या तो आश्चर्य होगा की भला 25 दिसंबर को “तुलसी पूजन दिवस” मनाने की प्रथा कब प्रारंभ हुई या क्यों मना रहे हैं?

क्योंकि जबसे हमने होश संभाला है तबसे हम 25 दिसंबर को “क्रिसमस” ही मनते देखते आ रहे है। और सभी स्कूलों और कंपनियों में “क्रिसमस” मनाना खाना खाने जितना ही जरूरी हो गया है।

तो आखिर इस ट्रेंड की शुरुआत हुई कैसे?

और क्यों 25 दिसंबर को “क्रिसमस” के बजाय “तुलसी पूजन दिवस” मनाया जा रहा है?

बच्चों और युवाओं को धार्मिक और सुखी बनाने के लिए 25 दिसंबर को “तुलसी पूजन दिवस” मनाईये, जानिए तुलसी पूजन विधि

आखिर कौन संत या महापुरुष इस नए त्यौहार की प्रेरणा बने?

तो आईये सबसे पहले जान लेते है इसकी “बैक स्टोरी” के बारे में।

आखिर क्यों 25 दिसंबर को “क्रिसमस” के बजाय “तुलसी पूजन दिवस” मनाया जा रहा है?

धर्मवासियों, पश्चिम के प्रभाव से हमारा ही देश नहीं बल्कि पूरा विश्व आज एक नरकद्वार में जा रहा है, जैसे –

  • इन दिनों में बीते वर्ष की विदाई पर पाश्चात्य अंधानुकरण से नशाखोरी, आत्महत्या आदि की वृद्धि होती जा रही है |
  • मानसिक अवसाद, हत्या जैसे रोग भयानक रूप से बढ़ गए है।
  • पश्चिमी फेस्टिवल्स केवल कमाई करने के लिए व्यापक रूप से फैलाये गए है।

इसलिए हमारे भारत से इन कचरों को दूर करने के लिए और भारत को फिर से विश्वगुरु और महान बनाने के लिए एक महापुरुष और संत ने कमर कसी। उन्होंने 25 दिसंबर को “क्रिसमस” के बजाय “तुलसी पूजन दिवस” के रूप में मनाने का फैसला लिया। तो जाहिर सी बात है कि इससे सबसे जोरदार हलचल किस खेमे में मची होगी।

और क्या वो खेमा चुप बैठा होगा?

नहीं!

बिलकुल नहीं!

उस खेमे ने या कहे की गिरोह ने उस महान संत को सजा देने की ठानी। ऐसी सजा कि फिर कोई दूसरा संत हिंदू धर्म के उत्थान के बारे में फिर कभी न सोचे।

और कई सालों की कोशिश के बाद उस गिरोह को, उन महान संत को तगड़ा फँसाने का अचूक फार्मूला मिल गया। और छवि को खराब करने की कोशिश तो कई सालों से चल ही रही थी।

अब सत्ता भी जब हाथ में हो तो क्या नहीं कर सकता है इंसान।

और इस बार वे कामयाब भी हो गए।

इस गिरोह ने उस संत को ऐसे फँसाया कि अपने भी अपने ना रहे। उन संत को फँसाने के लिए कुछ घर के भेदियों का सहारा लिया गया या यो कहिये कि कुछ लोगों को साजिश के तहत प्लांट किया गया।

इस साजिश में फँसते ही साथी संतों ने भी बदनामी के डर से या खुद भी फँस जाने के डर से उन महान संत का साथ छोड़ दिया। जबकि उन महान संत ने जब साथी संत मुसीबत में थे तब मजबूती से वे उनके साथ खड़े रहे थे। और नेता लोग तो पहले ही पतली गली से निकल जाते है।

और अब बचे भक्त। और कोई एक-दो हज़ार नहीं बल्कि करोड़ों की संख्या में भक्त और शिष्य। ये केवल अनुमान नहीं है बल्कि डॉक्युमेंटेड है।

तो इन भक्तों की श्रद्धा भी तोड़ना कोई आसान काम नहीं था। तो इस काम के लिए आप सभी समझ ही सकते है कि किसको लगाया होगा। जो आज ऑन-एयर बड़े देशभक्त और धर्मरक्षक बनते है सबसे ज्यादा छवि मलिन करने का काम इन्हीं लोगों ने बहुत ही चिल्ला चिल्ला कर किया था।

और वे हो गए सफल अपने प्रोपगैंडा में। कहते है कि जब तक सच चप्पल पहनता है तब तक झूठ पूरी दुनिया का कई बार चक्कर लगा लेता है।

इस लेख में मैं आपको उन महान संत का नाम नहीं बताऊँगा। समझ तो आप गए ही होंगे।

अगर आपको असलियत जानना है तो इस लेख पर आँखे बंद करके भरोसा मत कीजिये। और उन लोगों पर भी भरोसा मत कीजिये जिन लोगों ने कुछ साल पहले चिल्ला चिल्ला कर आपको सच/झूठ बताया था। क्योंकि अब तो आप इतने समझदार हो ही चुके होंगे की इन लोगों का प्रोपगैंडा समझ सके और इनकी रोजी रोटी कैसे चलती है यह तो आपको बखूबी पता चल ही चुका होगा।

तो जाइये।

अपने फ़ोन की पावर का इस्तेमाल कीजिये और रिसर्च कीजिये की आखिर क्या हुआ होगा और क्या है सच्चाई।

क्या आप सच्चाई नहीं जानना चाहेंगे?

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